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मौनी अमावस्या

वैसे तो सोमवार और अमावस का योग श्रेष्ठ होता है पर इस दिन समस्त तीर्थ, कपिलधारा, गंगा, पुष्कर, दिव्य अंतरिक्ष और भूमि के सभी तीर्थ एक साथ रहते हैं, ऐसी मान्यता है इस समय किये गये श्राद्ध व स्नान पुण्यकारी माने गये हैं । इसी दिन प्रथम तीर्थकर ऋषभ देव ने अपनी लंबी तपस्या का मौन व्रत तोड़ा था और यही संगम तट पर अपने हजारों अनुयायियों व अयोध्या राजय के बंधु-बांधवों के साथ गंगा स्नान किया था । इस वजह से भी अर्द्धकुम्भ में सबसे अधिक भीड़ इसी स्नान पर्व पर होती है ।

सोमवार, ०४ फरवरी २०१९
पूर्ण दिवस
संगम, प्रयागराज
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